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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, Verse 25

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

भावाभावेषु यत्तुल्यं तन्नाशे तत्स्थितौ च वा । यः प्रयत्नस्त्वबुद्धित्वात्तद्योगगमनं भवेत् ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई शंका करे, योगनिद्रा द्वारा स्वरूपयुख गमन का त्यागकर दैत्यपुर गमन आपके लिए उचित नहीं है, तो इस पर कहते है । आसक्ति के अभाव से जो गमन आदि प्रयत्न हे, वह योगगमन ही है वह अन्य ओर गमन नहीं है, क्योकि योगनिद्रा से प्राप्त होनेवाला जो सुख हे, वह गमनयत्न की उत्पत्ति और अनुत्पत्ति में समान है ओर गमन प्रयत्न आदि की स्थिति ओर नाश में समान है