Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 38, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
जीवनमुक्तसमाधिस्थः करोत्वसुरनाथताम् ।
मणिर्मुक्तमनस्कारः प्रतिबिम्बक्रियामिव ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे मन की चेष्टा से रहित मणि अपने में संनिहित
वस्तु के प्रतिबिम्ब को धारण करती हे वैसे ही जीवन्मुक्तो की अनासक्तिरूप समाधि में स्थित प्रह्लाद
दानवाधिपत्य को ग्रहण करे