Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 37, Verses 12–13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 37, verses 12–13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 12,13
संस्कृत श्लोक
अथोद्विग्नेषु दैत्येषु गतेष्वभिमतां दिशम् ।
विचरत्सु यथाकाममराजनि पुरे पुरा ॥ १२ ॥
चिराय पातालमभूदभूपालतया तया ।
मात्स्यन्यायविपर्यस्तमस्तंगतगुणक्रमम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर पहले भयभीत हुए निर्बल दैत्यों के अपने अभीष्ट देशों को चले जाने पर ओर बलवान्
दैत्यों के दस्युओं की भोति अराजक नगर में यथेच्छ लूट-पाट व्यवहार करने पर उक्त अराजकता से
सारा पाताल चिरकाल तक बलवान द्वारा दुर्बलो के उत्पीडनरूप मात्स्यन्याय से अस्त-व्यस्त और
मयदिारहित हो गया