Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 36, Verses 25–26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 36, verses 25–26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 25,26
संस्कृत श्लोक
अहं त्वमितिशब्दाभ्यां पर्यायाभ्यां महात्मनः ।
तव वा मम वा शाखा संयुक्ताभ्यां नमोनमः ॥ २५ ॥
नमो मह्यमनन्ताय निरहंकाररूपिणे ।
नमो मह्यमरूपाय नमः समसमात्मने ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
अव अखण्डार्थ में प्रमाणरूप से सम्पन्न अहं ओर त्वं शब्दों को नमस्कार करते हैं।
लक्ष्य महात्मा के बाधन में पर्यायरूप, कारणो पाधि विशिष्ट वाच्यार्थ तुम्हारे अथवा
कार्योपाधिविशिष्टवाच्यार्थ मेरे शाखा के समान एकदेश भूतउपाधि द्वारा भेदकल्पना से संयुक्त त्वम
ओर अहं शब्दों को पुनः पुनः नमस्कार हे । अनन्त मुञ्च प्रत्यगात्मरूप को नमस्कार है, अत्यन्त सम
स्वरूप को नमस्कार है, अहंकार रहित तथा रूपरहित मुञ्च प्रत्यगात्मा को नमस्कार हे