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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

मनांसि क्षोभयत्येष पल्लवानीव मारुतः । वाहयत्यक्षपङ्कतिं स्वामश्वालीमिव सारथिः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई कहे कि मन अथवा इन्द्र्यो ही देहादि को कर्म में प्रवृत्त करती हैं, आत्मा नहीं करता, तो इस पर कहते हैं। जैसे वायु पल्लव में हलचल पैदा करता है वैसे ही यह आत्मा मन में क्षोभ पैदा करता है। जैसे सारथि घोड़ों को हॉँकता है वैसे ही यह अपनी इन्द्रियों को तत्‌-तत्‌ कार्यो में प्रवृत्त करता है