Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
संभ्रमेणेव पाषाणे संबन्धो मयि नेतरैः ।
सुखदुःखश्रियो देहे मा पतन्तु पतन्तु वा ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
तुम्बी के ऊपर
जलधाराओं के तुल्य देह में सुख-दुःख गिरे अथवा न गिरे उससे तुम्बी के आकाश के तुल्य हम लोगों
की कौन क्षति है ?