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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 35, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

अस्मिन्दृष्टे जगद्दृष्टं श्रुतेऽस्मिन्सकलं श्रुतम् । स्पृष्टेचास्मिञ्जगत्स्पृष्टं स्थितेऽस्मिन्संस्थितं जगत् ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

एकमात्र उसके विज्ञान से सर्वविज्ञान होता है, ऐसा कहते है । इस परमात्मा का दर्शन होने पर सारा जगत्‌ दृष्ट होता है, इसके सुनने पर सब सुना जाता हे, इसका स्पर्श होने पर सारे जगत्‌ का स्पर्श हो जाता है तथा इसके रहने पर जगत्‌ स्थित होता है यानी जगत्‌ उसकी सत्ता के अधीन सत्तावाला है