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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 50

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, verse 50 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 50

संस्कृत श्लोक

मयेदमाप्यते सर्वं सत्ता मां प्राप्य गच्छति । मत्परित्यक्तमेतच्च सदप्येव न किंचन ॥ ५० ॥

हिन्दी अर्थ

मुझसे कारणरूप से यह जगत्‌ व्याप्त किया जाता है। मुझे ही प्राप्त होकर यह सत्ता को प्राप्त होता है । अपने तत्त्वदर्शन द्वारा मुझसे परित्यक्त हुआ यह जगत्‌ जीवन्मुक्त व्यवहार में विद्यमान होता हुआ भी कुछ नहीं है