Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, Verse 101
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 34, verse 101 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 101
संस्कृत श्लोक
याति वाचामगम्यत्वादसत्तामिव शाश्वतीम् ।
नैरात्म्यसिद्धान्तदशामुपयातेव तिष्ठति ॥ १०१ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त चिति वाणी व्यवहार के अगोचर होने से
शाश्वत असत्ता को प्राप्त-सी होती है । नैरात्म्यसिद्धान्तदशा को (शून्यवादी की सिद्धान्तावस्था को
यानी शून्यरूपता को ) प्राप्त हुई सी स्थित होती है, चूँकि स्थित है, इसलिए वस्तुतः नैरात्म्यसिद्धान्तदशा
को प्राप्त नहीं हुई है कारण कि सत् असत् नहीं हो सकता