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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, Verses 16–17

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, verses 16–17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 16, 17

संस्कृत श्लोक

अथ पातालमार्गेण विष्णुराह्लादिताग्रतः । पूजादेवगृहं तस्य प्रह्लादस्य समाययौ ॥ १६ ॥ विज्ञायाभ्यागतं देवं पूजया द्विगुणेद्धया । दैत्येन्द्रः पुण्डरीकाक्षमादरात्पर्यपूजयत् ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर भक्तों को आह्वादित करनेवाले भगवान्‌ विष्णु पाताल मार्ग से पूजा देवगृह मे प्रह्लाद के सामने आये। भगवान्‌ पुण्डरीकाक्ष को आये हुए जानकर दैत्यराज प्रह्लाद ने दुगुनी सामग्री से देदीप्यमान पूजा से आदरपूर्वक उनकी पूजा की