Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 33, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
न विशश्राम चेतोऽस्य भोगरोगानुरञ्जने ।
मुक्ताफलमसंश्लिष्टं मुक्ताफल इवामले ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे न गुंथा
हुआ मोती निर्मल मोती पर स्थिर नहीं रह सकता वैसे ही भोगरूपी रोगों के विषयरूपी अपथ्य के सेवन
द्वारा अनुकूल आचरण में उसका चित्त स्थिर नहीं होता था