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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 32, Verse 33

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 32, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

कमलिनी परुषोषरभूगता सुखयतीह यथा न दुराश्रया । दितिसुतोऽपि हि माधवभक्तिमानिति कथा न तथेश सुखाय नः ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

कमलिनी सन्तप्त ऊषर भूमि में स्थित है, यह कथा जैसे श्रोताओं को सुख नहीं देती वैसे ही हे भगवन्‌, दिति की सन्तति भी भगवान में भक्ति करती है यह अधम पुरुष का अवलंबन करनेवाली कथा भी हमारे लिए सुखदायी नहीं है