Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, Verse 53
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, verse 53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
इयं मे रत्नचित्राङ्गी सुमेरुशिखरोपमा ।
हेमाङ्गदा गदा गुर्वी दैत्यदानवमर्दिनी ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
यह रत्नों से चित्र-विचित्र शरीरवाली अतएव सुमेरु के शिखर के तुल्य,
सोने से मठी हुई मेरी भारी गदा है, जो दैत्य ओर दानवो का संहार करती है