Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
कष्टं तात पुरंध्रीणा शुष्काम्बुरुहनीरसाः ।
विलासाः सुरनारीभिर्भर्त्स्यन्ते लास्यलीलया ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
बड़े खेद की बात है, मेरे पिताजी की पटरानियों के सूखे हुए कमलों की
तरह नीरस विलासों की अप्सराएँ नृत्यों में अनुकरण द्वारा भर्त्सना करती हैं