Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 31, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
मन्ये दानमहानद्यः सुरेभकटभित्तिषु ।
प्रवृत्तास्ता भविष्यन्ति शैलसानुष्विवापगाः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
मालूम पड़ता है, देवताओं की ऐरावत आदि हाथियों के गण्डस्थल में बह रही मदधारारूपी
महानदियाँ शैल शिखरों पर बह रही नदियों के समान हो जायेगी