Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 30, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 30, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
तेऽवर्धन्ताचिरेणैव तेजस्यूर्जितबालकाः ।
दशार्कांशुशतानीव व्योमाक्रान्तिविलासिनः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे तेज में बढी-चढी ओर अवस्था में नयी, आकाश में
फैलने से शोभित होनेवाली सूर्य की हजार किरणें शीघ्र वृद्धि को प्राप्त हो जाती हे वैसे ही तेज में बढ़े-
चढ़े अवस्था से बालक से स्वर्ग में आक्रमण करने से शोभित होनेवाले वे शीघ्र ही युवा हो गये