Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 30, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 30, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
अखिद्यन्तास्य तेनाथ सूर्येन्दुप्रमुखाः सुराः ।
दुर्विलासविलोलस्य बालस्येव स्वबन्धवः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे दुलार
से बिगड़े हुए बालक के मर्यादा के उल्लंघन से बन्धु - बान्धव दुःखी होते हे वैसे ही उसके आक्रमणजनित
सन्ताप से सूर्य, चन्द्र आदि देवता खिन्न हुए