Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 29, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
त्वमनन्तो महाबाहो त्वमाद्यः पुरुषोत्तमः ।
त्वं पदार्थशताकारैः परिस्फूर्जसि चिद्वपुः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि श्रीरामचन्द्रजी को शंका हो कि मैं जीव हूँ, मेरी ईश्वरात्म समद्रष्टि कैसे हो सकती है, तो इस
पर कहते हैं।
हे महाबाहो, आप अनन्त हैं, आदिपुरुषोत्तम भी आप ही हैं, अनन्त पदार्थों के आकार से चैतन्यरूप
आप ही वृद्धि को प्राप्त हुए है