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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 26, Verses 6–7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 26, verses 6–7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 6,7

संस्कृत श्लोक

रत्नार्घ्यपरिपूर्णाङ्गं कृतमन्दारशेखरम् । महार्हासनविश्रान्तमथोवाच गुरुं बलिः ॥ ६ ॥ बलिरुवाच । भगवंस्त्वत्प्रसादोत्था प्रतिभेयं पुरस्तव । नियोजयति मां वक्तुं कार्यं कर्तुमिवार्कभाः ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

हे भगवन्‌, जैसे सूर्य की प्रभा सन्ध्यावन्दन आदि कार्य करने के लिए लोगों को प्रेरित करती है, वैसे ही आपकी प्रसन्नता से उत्पन्न हुई मेरी यह प्रतिभा मुझे आपके सामने कहने के लिए प्रेरित करती हे