Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 26, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 26, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
अथ सर्वगतानन्तचिदात्मा भार्गवः प्रभुः ।
आनिनाय स देहं स्वं रत्नवातायनं बलेः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर भगवान शुक्राचार्यजी, जो सर्वगत अनन्त चिदात्मा हे, देहसहित अपने को बलि के रत्नमय
झरोखे के प्रति ले आये