Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 26, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 26, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
खं व्रजाम्यहमत्रैव मुनयः सप्त संगताः ।
केनापि सुरकार्येण वस्तव्यं तत्र वै मया ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं देवलोक में जाता हूँ, यहीं पर सप्तर्षि मुझे मिले थे, वहाँ पर किसी देवकार्य से
मुझे जाना है