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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 21, Verses 2–3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 21, verses 2–3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 2,3

संस्कृत श्लोक

उभावपि ततः सिद्धौ ज्ञानविज्ञानपारगौ । विचेरतुर्वने तस्मिन्यावदिच्छमनिन्दितौ ॥ २ ॥ ततः कदाचित्कालेन निर्वाणपदमागतौ । तौ विदेहौ गतस्नेहौ दीपाविव शमं गतौ ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

ज्ञान ओर विज्ञान में पारंगत, सिद्ध ओर आनन्दित वे दोनों ही प्रारब्ध कर्मो का नाश होने तक उस वन मेँ भ्रमण करते थे । तदनन्तर समय पाकर कभी तेलरहित दीपको के समान शान्ति को प्राप्त हुए वे दोनों विदेह होकर निर्वाण पद को प्राप्त हो गये