Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 2, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 2, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
निवृत्तयानया कः स्याद्गुणो दोषोऽथ वा भवेत् ।
कथमात्मनि चैवायं तते संकोच आगतः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
इस माया के निवृत्त होने से
क्या गुण होता है ? अथवा सम्पूर्ण भोग्य, भोक्ता और भोग की निवृत्ति होने से पुरुषार्थ विघातरूप दोष
होता है ? आकाश से भी विस्तीर्ण आत्मा में यह संकोच (परिच्छेद) कहाँ से आया ?