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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 2, Verses 10–11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 2, verses 10–11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 10,11

संस्कृत श्लोक

ततश्चाभ्युदिता श्यामा कामिनीशोकहारिणी । क्षीरोदादिव माहेन्द्री चन्द्रावश्यायदायिनी ॥ १० ॥ शनैरास्तीर्णपुष्पेषु कीर्णकर्पूरमुष्टिषु । दीर्घेन्दुबिम्बरम्येषु तस्थुस्तल्पेषु राघवाः ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

तदुपरान्त कान्त के संगम से कामिनियों के शोक का नाश करनेवाली तथा चन्द्रमा ओर तुषार को देनेवाली रात्रि क्षीरसागर से प्रकट हुई पूर्व दिशा के तुल्य आविर्भूत हुई। धीरे-धीरे श्रीरामचन्द्रजी आदि राजकुमार दीर्घ चन्द्रविम्बके समान रमणीय विस्तरो पर सोये जो फूलों से भरे थे ओर कपूर का चूर्ण जिन पर मुट्ठियों से बखेरा था