Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 2, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 2, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवाल्मीकिरुवाच ।
ते समेत्य गृहं गत्वा राजपुत्राः शशित्विषः ।
चक्रुः सर्वमशेषेण स्वसद्मसु दिनक्रमम् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
चन्द्रमा के तुल्य कान्तिवाले उन राजपुत्रो ने साथ साथ घर जाकर अपने अपने भवनों में भलीभाँति
आहिक कार्य किया
सर्ग सन्दर्भ
पहला सर्ग समाप्त दूसरा सर्ग आहिक कर्मनुष्ठान, श्रीरामचन्द्रजी का सुनी हुई वार्ताओं का चिन्तन तथा सुने हुए पदार्थो में स्थिरता के लिए बुद्धि आदि की प्रार्थना करना ।