Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 63
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, verse 63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
नास्तमेति न चोदेति यश्चिदाकाशवन्महान् ।
सर्वं संपश्यति स्वस्थः स्वस्थो भूमितलं यथा ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
जो पुरुष महान है, वह
चिदाकाश के समान न तो अस्त को प्राप्त होता है ओर न उदित होता हे, जैसे आकाश में स्थित पुरुष
भूतल को देखता है, वैसे ही वह स्वरूप में प्रतिष्ठित हो सबको देखता है