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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verses 40–41

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, verses 40–41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

पुरा भूत्वाद्य भूत्वा च भूयश्चेन्न भविष्यसि । तथापि क्षीणसंसारः किमर्थमनुशोचसि ॥ ४० ॥ तस्मान्न दुःखिता युक्ता प्राकृते जागते क्रमे । तथैव मुदिता युक्ता युक्तं कार्यानुवर्तनम् ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

तीसरे पक्ष में कहते हैं। पहले उत्पन्न होकर और इस समय उत्पन्न होकर फिर आप आगे नहीं उत्पन्न होगे, तथापि अपने नष्ट होने के कारण क्षीण संसार (जिसका संसार क्षीण हो गया है) आप किसलिए शोक करते हैं ?