Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
आत्मतत्त्वेकसारोऽहमिति जातधियो भयैः ।
न ते रामास्ति संबन्धः किं बिभेषि जगद्भ्रमात् ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, मैं, जिसका केवल आत्मता ही एकमात्र परमानन्दसत्य है,
ऐसा हूँ, इस प्रकार की जिन्हे बुद्धि प्राप्त हो गई, ऐसे आपका भय के कारणों से सम्बन्ध नहीं है, फिर
आप जगत के भय से क्यों डरते है ?