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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verses 23–24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, verses 23–24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 23,24

संस्कृत श्लोक

ज्ञातवानसि सर्वेषां भावानां सम्यगन्तरम् । यथेच्छसि तथा दृष्ट्या लोके विहर राघव ॥ २३ ॥ कृत्रिमोल्लासहर्षस्थः कृत्रिमोद्वेगगर्हणः । कृत्रिमारम्भसंरम्भो लोके विहर राघव ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, अप सब पदार्थो का व्यवहारतः ओर परमार्थतः सारासार तारतम्य जान चुके हैं, इसलिए आप जैसे चाहते हैं, वैसी दृष्टि से लोक में विहार कीजिये । हे श्रीरामचन्द्रजी, कृत्रिमरूप से उल्लास और हर्ष में स्थित, कृत्रिमरूप से दुःख की गर्हा (निंदा) करनेवाले ओर कृत्रिमरूप से कार्य के आडम्बर से युक्त आप लोक में विहार कीजिये