Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
प्रविचार्य दशाः सर्वा यदतुच्छं परं पदम् ।
तदेव भावेनालम्ब्य लोके विहर राघव ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, सब संसार दशाओं ओर परमार्थस्वरूप में स्थिति रूप भिन्न-भिन्न भूमिका
दशाओं का विचार करके जो परमार्थ सत्य परम पद है, उसी का भावना द्वारा अवलम्बन कर आप लोक
में विहार कीजिये