Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
अन्तः संत्यक्तसर्वाशो वीतरागो विवासनः ।
बहिः सर्वसमाचारो लोके विहर राघव ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, भीतर सब आशाओं का त्याग कर वीतराग, वासनारहित हुए आप बाहर सब
कर्म आचारो मे अनुवर्तनशील होकर लोक में विहार कीजिए