Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 18, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
युक्तायुक्तदृशा ग्रस्तमाशोपहतचेष्टितम् ।
जानाति लोकदृष्टान्तं करकोटरबिल्ववत् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
यह युक्त है और यह अयुक्त है, इस प्रकार वैषम्य दृष्टि से ग्रस्त एवं
आशय से जिसकी दृष्टि नष्ट है, ऐसे पुरुष से किये गये लोक दृष्टान्त को अपक्षपाती होने के कारण
हाथ मेँ स्थित बिल्वफल के समान वह जानता है । भाव यह कि यदि एकका पक्षपात होता तो उस पक्ष
के दोष तथा दूसरे पक्ष के गुण रागद्वेष से आच्छन्न होने के कारण स्पष्ट नहीं भासित होते, अपक्षपाती
को दोनों स्पष्टरूप से भासित होते हँ