Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 17, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 17, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 17 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
एतेषां प्रथमः प्रोक्तस्तृष्णाया बन्धयोग्यता ।
शुद्धतृष्णास्त्रयः स्वच्छा जीवन्मुक्तविलासिनः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई शंका करे, तृष्णा भेद के निरूपण के अवसर पर इस विभाग की क्या आवश्यकता है ?
तो इस पर कहते हैं।
इनमें से पहला निश्चय बन्धन का हेतु है, इसके रहने पर ही तृष्णा बन्धक होती है। निर्दोष तृष्णावाले
शेष तीन निश्चय स्वच्छ हैं । जीवन्मुक्त पुरुषों में ही वे विलास करते हैं