Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 16, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 16, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
तत्कथं संत्यजाम्येनं जीवामि च कथं मुने ।
एनमर्थं विनिश्चित्य वद मे वदतां वर ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए मैं इस अहंकार का केसे त्याग करूँ कैसे जीऊँ, हे वक्ता ओं म श्रेष्ठ मुनिजी, इस विषय को खूब
विचार कर मुझसे कहिए