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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 14, Verse 51

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 14, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 51

संस्कृत श्लोक

स्वाद्यस्वादकसंत्यक्तं स्वाद्यस्वादकमध्यगम् । स्वादनं केवलं ध्यायन्नित्यमात्ममयो भव ॥ ५१ ॥

हिन्दी अर्थ

चाक्षुष त्रिपुटी की भति आसन आदि ब्रुटियों में भी उस साक्षी का ही ध्यान करना चाहिये, ऐसा कहते हैं। आस्वाद्य और आस्वादक से परित्यक्त और स्वाद्य और स्वादक के मध्य में स्थित केवल स्वादन का ध्यान करते हुए आप सदा आत्ममय होइये