Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 14, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 14, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
कः कुष्ठघर्घरघ्राणं नानामोदविचारणे ।
मूर्खमात्मोपदेशेन प्रमाणीकुरुतेऽमतिः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
कौन दुर्बुद्धि पुरुष कुष्ठरोग से छिन्न-भिन्न, घर्घर शब्द करनेवाली नासिका से युक्त पुरुष को
विविध सुगन्धो की परीक्षा में सुगन्धतत्त्व का निर्णायक बनायेगा ? वैसे ही कौन अबुद्धि पुरुष आत्मोपदेश
द्वारा मूर्ख को प्रामाणिक बनायेगा ?