Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 82
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 82 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 82
संस्कृत श्लोक
निर्विकल्पाच्चितः सत्ता संकल्पाङ्ककलङ्किता ।
कलनेत्युच्यते तेन पुंस्त्ववद्बुद्ध्यते मनः ॥ ८२ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए संकल्प चित्त की उत्पत्ति में बीज है, यह हम बहुत बार कह आए है, ऐसा कहते हैं।
संसार की उत्पत्ति के लिए संकल्पता को प्राप्त हो रहे आत्मा का चित्स्वभाव से जो थोड़ा-सा
विचलन होना है, वही चित्त के जन्मका कारण है, इसमें कोई सन्देह नहीं हे ॥८ १॥
पूर्वोक्त विषय को ही स्पष्ट करके कहते हैं।
निर्विकल्प चित्त से प्रच्युत हुई, संकल्परूप कलंक से कलंकित सत्ता कलना कही जाती हे । जैसे
स्त्री आदि की संकल्पना से पुंसत्व उद्बुद्ध होता है, वैसे ही उक्त कलना से मन जगत की उत्पत्ति के
लिए प्रबुद्ध होता है