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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

न दैवं नच कर्माणि न धनानि न बान्धवाः । शरणं भवभीतानां स्वप्रयत्नादृते नृणाम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

विचार की जड़ भी पुरुष प्रयत्न ही है, इस आशय से कहते हैं। संसार से भयभीत हुए पुरुषों का अपने प्रयत्न को छोड़कर न तो भाग्य शरण है, न कर्म शरण हैं, न धन शरण है और न बन्धु-बान्धव ही शरण हैं