Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

हेयोपादेयकलने क्षीणे यावन्न चेतसः । न तावत्समता भातिसाभ्रे व्योम्नीवचन्द्रिका ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

जब तक चित्त से हेय ओर उपादेय की कल्पना क्षीण नहीं हई, तब तक जैसे मेघाच्छन्न आकाश में चाँदनी शोभित नहीं होती वैसे ही समता (अविषम ब्रह्मात्मता) शोभित नहीं होती