Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 13, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
नाहमस्ति न चान्योस्ति नच नास्तीति भावितम् ।
मनः प्रशान्तिमायातं नोपादेयेषु मज्जति ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
न अहन्ता है, न अन्य है ओर न तो शून्य ही है, क्योकि दोनों का साक्षी विद्यमान
है, इस प्रकार से भावित मन शान्ति को प्राप्त होकर ग्रहण योग्य विषयों में मग्न नहीं होता