Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verse 37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
विवेकिनमसंमूढं प्राज्ञमाशागणोत्थिताः ।
दोषा न परिबाधन्ते सन्नद्धमिव सायकाः ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
तृष्णा के वर्ग के लोभ, मोह, क्रोध, चिन्ता आदि से उत्पन्न हुए द्वेष,
चिन्ता, अविद्या आदि दोष विवेकशील अतएव असंमूढ पुरुष को इस प्रकार पीड़ित नहीं करते, जिस
प्रकार किं कवचयुक्त पुरुष को बाण पीडित नहीं कर सकते