Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

प्रज्ञयोत्तीर्यते भीमात्तस्मात्संसारसागरात् । न दानैर्न च वा तीर्थैस्तपसा नच राघव ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

आत्यन्तिक दुःखक्षय भी एकमात्र प्रज्ञा का ही फल है, ऐसा कहते हैं। हे श्रीरामचन्द्रजी, भयंकर इस संसार सागर से प्रज्ञा द्वारा ही निस्तार होता है, दानों से, तीर्थो से अथवा तपस्या से इस संसार से निस्तार नहीं मिलता | दान, तप आदि का फल छोटे-मोटे पापों का क्षय है, संसारसागर से निस्तार रूप महाफल नहीं है