Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 12, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
दुरुत्तरा या विपदो दुःखकल्लोलसंकुलाः ।
तीर्यते प्रज्ञया ताभ्यो नावापद्भ्यो महामते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे महामते, जो विपत्तियाँ दुस्तर हैं और
दुःखरूपी महातरगों से भरी हैं, उन आपत्तिरूपी नदियों से प्रज्ञारूपी नौका द्वारा ही निस्तार होता
है