Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 11, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 11, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
असदेतत्तु सच्चेत्त्वं तथापि किल सुन्दर ।
सङ्गः सदसतोः कीदृग्वद त्वं मर्त्यजीवयोः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कहते हो, मैं असत् नहीं हूँ। सत्य आत्मा ही मैं हूँ। दृश्य ही असत् है, तो भी दोनों का सम्बन्ध
नहीं बन सकता, ऐसा कहते हैं।
हे सुन्दर, यदि यह दृश्य असत् है और तुम सत्य हो, तो भला बतलाओ तो सही, सदसद्रूप सदा मृत
और जीवितों का सम्बन्ध कैसे हो सकता है २