Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 9, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 9, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । इति चिन्तयतस्तस्य शुक्रस्य पितुरग्रतः । जगामातितरां कालो बहुसंवत्सरात्मकः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

नौवाँ सर्ग भृगु ऋषि के समीप में स्थित मृतप्राय शुक्र शरीर के पतन और सूखने का वर्णन | श्रीवसिष्टजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, इस प्रकार पिता के आगे मनोराज्यों से कल्पना कर रहे श्री शुक्राचार्य का अनेक वर्ष का लम्बा समय बीत गया