Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
शालींस्तान्भुक्तवान्पक्वान्दशार्णेषु द्विजोत्तमः ।
स शुक्रः शुक्रतामेत्य तद्भार्यातनयोऽभवत् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
पके हुए उन धानों को दशार्ण देश निवासी ब्राह्मण ने खाया। वह शुक्राचार्य वीर्य बनकर उस ब्राह्मण की
भार्या का पुत्र हुआ