Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 8, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
अथावसदसौ शुक्रः पुरन्दरपुरे पुनः ।
सुखं चतुर्युगान्यष्टौ हरिणेक्षणया सह ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर श्री शुक्राचार्य ने उस मृगनयनी के साथ पुनः स्वर्ग में सुखपूर्वक आठ चौकड़ियों तक
निवास किया