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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, Verse 25

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

अधःकरोति निष्यन्दं चन्द्रमाह्लादनं प्रिय । न तथा सुखयत्येषा चेतस्त्रिभुवनेशिता ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

यह त्रिलोकी का ऐश्वर्य चित्त को वैसा आनन्द नहीं देता जैसा कि पहले-पहल अनुकृत हुए प्रियतमो का परस्पर आनन्द देनेवाला प्रेम सुख देता हे