Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
कृपणाश्वासनं साधो विद्धि सच्चरितव्रतम् ।
स्नेहदृष्टिमजानद्भिर्मूढैरेव महामते ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महामते, स्नेहदृष्टि को न जाननेवाले मूढजन ही अत्यधिक प्रीति की अवहेलना करते
है, रसज्ञ लोग कदापि प्रीति की अवहेलना नहीं करते हैं