Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
रराज च सुरेभस्य हृदि लग्नेव पद्मिनी ।
उवाच चेदं मधुरं रसस्नेहाक्तया गिरा ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
प्रेम ओर स्नेह से सराबोर वाणी से उसने यह मधुर
वचन कहा । उसके उस मधुर वचन में प्रत्येक अक्षर आनन्द के विलास से व्याप्त था